आजाद कहाँ हैं हम...?
Saturday, 13 August 2011
- By Unknown
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उठते सवाल..?
,
उभरती सोच
● आजाद कहाँ हैं हम...?
गुलामी जो घर से शुरू होती है वो दरवाजा पार करने पर भी नहीं रूकती..... घर वाली गुलामी तो सांकेतिक है जो जताती है कि बेटा अब सारे संसार में तुझे जी हुजूर ही कहते जाना है..... चाहे दफ्तर हो , पुलिस , राजनीती , और जाने कैसा कैसा गुलामी का दलदल भरा है सब जगह..... और हम कहते हैं कि देश आजाद हो गया.....
● __________ जोगी :(
मानसिकता परिवर्तन
Tuesday, 9 August 2011
- By Unknown
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● मानसिकता परिवर्तन (दर्शन) :
एक बड़ा सच यह भी है कि दुनिया का सबसे कठिन काम जमी हुई मानसिकताओं को बदलने का है....... जिसे असंभव की हद तक कठिन कहा जा सकता है...... क्यूँ आम तौर पर जब खुद हम ही नहीं बदलना चाहते तो कोई दूसरा ही कैसे बदल जाना है..... वह भी तो उसी कोशिश में लगा है.....
● जोगेन्द्र सिंह Jogendra Singh ( 09-08-2011 )
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