बावरी

● तुझे अपनी बावरी कहलवाना तो बस एक बहाना था..........
● यूँ तेरे मान के सदके, है कुर्बान मेरा सारा जहाँ..........

जोगेंद्र सिंह ... (16-09-2011)
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उम्र के पड़ाव



उम्र के पड़ाव ●

दिन बीते बेपरवाह वक्त के बेरहम रंगों से,
और इसी तरह पार होते चले गए, उम्र के मेरे पड़ाव सारे...

● _____ जोगी
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खोया चाँद



खोया चाँद


उम्र निकल चली खोये चाँद को खोजने में...
नामुराद कमबख्त मिलकर ही नहीं देता...


जोगेन्द्र सिंह Jogendra Singh ( 04-09-2011 )
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एक जहाँ पनीला सा




एक जहाँ पनीला सा ● ©


क़दमों तले एक जहाँ पनीला सा, मेरे सैलाब आँसूओं बह निकला है,
क्या खूब है आलम बेबसी का , हर आँसू अब खुद पर मुस्कुराता है...


जोगेंद्र सिंह Jogendra Singh ( 03-09-2011 )
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● http://web-acu.com/
● http://acu5.weebly.com/
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केवल लोकपाल..?


● केवल लोकपाल..?

● जब तक लोकपाल की पालना हमेशा तक के लिए निश्चित नहीं कर दी जाती तब तक मेरे लिए लोकपाल भी पुराने कानूनों की तरह से रद्दी कागज हैं जिन्हें रखने से कोई फायदा नहीं जबकि उसे बेच देने से किसी को एक दो वक्त का खाना जरुर मयस्सर हो जाना है.....

● सो काहे का जश्न.....?

● सही बात कभी भी कही जा सकती है....... इन लोगों ने गाडी तो चला ली है मगर पेट्रोल और मैप साथ लेना भूल गए हैं....... केवल लोकपाल क्या तीर मार लेगा जब तक कि जनता और शासन तंत्र दोनों में मन से जागरूकता ना आ जाये.......? इन्हें आन्दोलन कागज पास करवाने से आगे तक के लिए छेड़ना चाहिए था....... 

● जोगेन्द्र सिंह Jogendra Singh
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