हलचल


हलचल


क्या जाने क्या हिस्से आया, क्या ना आया,
खड़े हैं अब तक निस्तब्ध-मूक-अविचल,
कौन जाने होगी कब जाकर फिर ह्रदय-हलचल.....

 Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह  :(


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एक बूंद आँसू

एक बूंद आँसू

एक बूंद आँसू,
दूजी नाली का पानी,
किसेफरक पड़ जाना है,
ना इसे किसी ने देखा,
ना उसे किसी ने देखा...

जोगेन्द्र सिंह


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तडप

तडप...

सपने उनके, आँख हमारी,
नींद उनकी, जाग हमारी,
पीर उनकी, नम आँख हमारी,
अमानत किसी की,  तडप हमारी..... जोगी..... :-(
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सच्ची साधना

सच्ची साधना....... 



● सच्ची साधना....... हाँ, यही तो है वह , जिसे करने से बहुधा हम बच लिया करते हैं........ कितने कमाल की बात है ना, कि जागृत होने के लिए हमें प्रेरक प्रसंगों की जरुरत हुआ करती है....... और हम जागते भी कितना हैं........? कुछ क्षण.....? कुछ घंटे.....? या कुछ दिन.....? ना..... कतई ना..... हम जगे ही कहाँ होते हैं..... शायद सपने ऐसे ही असर रखते हों....... 


 जोगी...
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बेवफा

० बेवफा ०

जिन्दगी है जी, बेवफा है...
तू बेवफा, तो कभी मैं बेवफा...

० जगेन्द्र सिंह ०
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