निगाहों की तपिश



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उसने देखा मुझे, कुछ इस कदर,
कि रहमत पे तेरी मुझे ऐ खुदा,
छूट जाने लगा यकीन पल-पल,
शोलों भरी आँखों में नूर का अंश,
फडक-भड़क राख में बदलने लगा..


जोगेन्द्र सिंह : जोगी ( ०४-०४-२०११ )
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