चाक दिल



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न सुनाना तनहाइयों को तुम यादों का संगीत...
न दिल में होगा सकून न लब पर हँसी होगी...
न होगा आना तुम्हारा खंडहरों के वीरानों में...
न इस चाक दिल से फूटेगी अब कोंपल नयी...


जोगेन्द्र सिंह Jogendra Singh (16-05-2011)
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Comments

2 Responses to “चाक दिल”

16 May 2011 at 12:50 PM

सुन्दर भाव्।

16 May 2011 at 10:38 PM

धन्यवाद ▬● वंदना जी.........

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