सच्ची साधना

● सच्ची साधना....... 



● सच्ची साधना....... हाँ, यही तो है वह , जिसे करने से बहुधा हम बच लिया करते हैं........ कितने कमाल की बात है ना, कि जागृत होने के लिए हमें प्रेरक प्रसंगों की जरुरत हुआ करती है....... और हम जागते भी कितना हैं........? कुछ क्षण.....? कुछ घंटे.....? या कुछ दिन.....? ना..... कतई ना..... हम जगे ही कहाँ होते हैं..... शायद सपने ऐसे ही असर रखते हों....... 


● जोगी...
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बेवफा

० बेवफा ०

जिन्दगी है जी, बेवफा है...
तू बेवफा, तो कभी मैं बेवफा...

० जगेन्द्र सिंह ०
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लापता

० लापता ०

जब से तुम्हें मंजिल जान दर-दर खोजा किया,
क्या जानो पता खोजते हो गये अब हम भी लापता...

० जोगेन्द्र सिंह...
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शिकवा

० शिकवा ०

गर चाहे कोई शिकवा करना.....
तब भी सुना है पत्थरों से शिकायत नहीं होती...

० जोगेन्द्र सिंह ०
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शुकर था

० शुकर था ०

मुश्किल है किसी से ये कहना,
किस कदर हुआ दिल तार-तार अपना,
वो तो शुकर था मेरी आँख ही बह निकली,
वरना आज भी वो चल देते फिर एक बार मुस्कुराकर..

० जोगेन्द्र सिंह ०

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