कठपुतली

कठपुतली... ? ©


कैसी है रे तू कठपुतली...... ?

तेरे नाच पे सारा जीवन नाचे है,

समझ से हमने समझा अपना जिसे,

वह जीवन तुझ सा अब लगता क्यूँ है...?



जोगेन्द्र सिंह Jogendra singh ? ● ? ● ? ● ? ● ?

● ( 25-08-2011 )
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Comments

5 Responses to “कठपुतली”

26 August 2011 at 9:43 AM

जीवन कठपुतली जैसा ही होता है,कोई है जो हमे नचा रहा है।

सादर

4 September 2011 at 11:43 AM

कल 05/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

Sadhana Vaid said...
5 September 2011 at 8:37 AM

क्योंकि हम सब भी हालात की डोर से बँधी हुई कठपुतली की तरह ही हैं जिसका नियंता ऊपरवाला है ! सुन्दर क्षणिका ! आभार !

POOJA... said...
5 September 2011 at 1:42 PM

bahut khoob Jogendra ji...
yahi to sach hai... jise aapne chand shabdon mei samet liya...

8 September 2011 at 6:45 PM

हम सब कठपुतली ही तो हैं 'उसके' हाथों की ....
बहुत बढ़िया प्रस्तुति...
सादर बधाई...

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