बावरी

● तुझे अपनी बावरी कहलवाना तो बस एक बहाना था..........
● यूँ तेरे मान के सदके, है कुर्बान मेरा सारा जहाँ..........

जोगेंद्र सिंह ... (16-09-2011)
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Comments

One response to “ ”

S.N SHUKLA said...
16 September 2011 at 7:20 PM

jogendra singh ji

sundar prastuti ke liye badhai sweekaren.
मेरी १०० वीं पोस्ट , पर आप सादर आमंत्रित हैं

**************

ब्लॉग पर यह मेरी १००वीं प्रविष्टि है / अच्छा या बुरा , पहला शतक ! आपकी टिप्पणियों ने मेरा लगातार मार्गदर्शन तथा उत्साहवर्धन किया है /अपनी अब तक की " काव्य यात्रा " पर आपसे बेबाक प्रतिक्रिया की अपेक्षा करता हूँ / यदि मेरे प्रयास में कोई त्रुटियाँ हैं,तो उनसे भी अवश्य अवगत कराएं , आपका हर फैसला शिरोधार्य होगा . साभार - एस . एन . शुक्ल

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