नक्श-ऐ-दिल


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जन्मों की क्या बात कह दी तुमने , नक्श हुए तुम इस कदर दिल पर ||
हम क़यामत तक छिपा कर रखेंगे , रूह पर खुदे इन नाजुक हर्फों को ||

● जोगेंद्र सिंह Jogendra Singh (19-09-2011)
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