सूरत-ऐ-हालात



● सूरत-ऐ-हालात ● ©

जाने कितना समझाया बेबस दिल को,
बेकस दिल पे रहम किसी को न आया ||
सूरत- ऐ -हालात इतने संगीन न होते,
हमारी खताएं जो वो मुआफ कर जाते ||


● Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह (07-04-2012)
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Comments

One response to “सूरत-ऐ-हालात”

8 April 2012 at 12:43 PM

बहुत खूब ... लाजवाब शेर ..

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