बहते आँसू



बहते आँसू

उन्होंने कहा क्यूँ जाते वक्त हैं पलकें भीगी ,
हम तो बस कह गए बात मुस्कुराते हुए ,
देखते हैं बहाकर हम यादों को तुम्हारी ,
क्या जाने इसी बहाने फिर आ जाओ ,
तुम बहते हमारे आँसुओं की खातिर..

_____●_____ जोगी ( २८-०८-२०११ )
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कठपुतली

कठपुतली... ? ©


कैसी है रे तू कठपुतली...... ?

तेरे नाच पे सारा जीवन नाचे है,

समझ से हमने समझा अपना जिसे,

वह जीवन तुझ सा अब लगता क्यूँ है...?



जोगेन्द्र सिंह Jogendra singh ? ● ? ● ? ● ? ● ?

● ( 25-08-2011 )
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आजाद कहाँ हैं हम...?

आजाद कहाँ हैं हम...?

गुलामी जो घर से शुरू होती है वो दरवाजा पार करने पर भी नहीं रूकती..... घर वाली गुलामी तो सांकेतिक है जो जताती है कि बेटा अब सारे संसार में तुझे जी हुजूर ही कहते जाना है..... चाहे दफ्तर हो , पुलिस , राजनीती , और जाने कैसा कैसा गुलामी का दलदल भरा है सब जगह..... और हम कहते हैं कि देश आजाद हो गया.....

● __________ जोगी     :(
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मानसिकता परिवर्तन

मानसिकता परिवर्तन (दर्शन) :

एक बड़ा सच यह भी है कि दुनिया का सबसे कठिन काम जमी हुई मानसिकताओं को बदलने का है....... जिसे असंभव की हद तक कठिन कहा जा सकता है...... क्यूँ आम तौर पर जब खुद हम ही नहीं बदलना चाहते तो कोई दूसरा ही कैसे बदल जाना है..... वह भी तो उसी कोशिश में लगा है..... 

● जोगेन्द्र सिंह Jogendra Singh ( 09-08-2011 )

.
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हर शख्स तनहा


हर शख्स तनहा होता है , हर लफ्ज़ तनहा होता है,
वह तो लेकर किसी का साथ मिट जाती है तनहाई,
वरना हर लफ्ज़ तरसता है यहाँ अपने अंजाम को...

__________ जोगी     ( 07-08-2011 )
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