बात लबों पर



छुपी छुपी सी है बात लबों पर..
अहसासात भी हैं दबे दबे..

असर हुआ रद्दोबदल का..
कुछ इस क़दर..
कहनी थी तुमसे जो बात..
न पहना सके..
अमली जामा हम उसे..
जद्दोज़हद में है दिल शायद..
बीच इसके..
आकर तुम चले गए..

"कल रात बरसात में..
हुई तुमसे जो बात..
इशारों पर इशारे..
मौला क्या कहूँ..
बात तब भी न कह पाए तुमसे.."

कहना होता भी कैसे..?
सफ़र बचपन से ज़वानी तक..
गुज़रा है मेरा डर-डर के..

क्यूँ न समझ लेती..?
खुद ही तुम इसे..
बात परदे की..
रह जाती परदे ही में..
न तुम कुछ कहो..
न हम कुछ कहें..
बन जाने दो अब कहानी..
अनकही इस बात को..

चाहूँगा जगह अब..
दिन रात तुम्हारे खयालो में..
दे सको दे दो जगह वर्ना..
ज़बरन घुस-पैठ कर जाऊंगा..

जोगेंद्र सिंह Jogendra Singh ( 06 अगस्त 2010 )

Photography by : Jogendra Singh ( for both the pictures )
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सोचा न था




सोचा न था कि कभी, विविध पहलु जीवन के, होंगे उजागर इस क़दर कभी..
होंगी साँसें अधर में लटकी, हकीकी दुनिया से ज़ब होंगे वाकिफ यूँ हम कभी..

जोगेंद्र सिंह Jogendra Singh ( 05 अगस्त 2010 )

Photegraphy by : Jogendra Singh http://jogendrasingh.blogspot.com/


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खोया-खोया चाँद




खोये-खोये चाँद की तलाश में, ख्वाबों में क्यूँ खोये चले जाते हो तुम..
नज़रें उठा कर देखो ज़रा तुम आईना, एक चाँद छुपा बैठा हैं उसमें भी.. ©

जोगेंद्र सिंह Jogendra Singh ( 05 अगस्त 2010 )


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ख्वाबों सी कैफ़ियत



मिल जाती है ख्वाबों सी कैफ़ियत, जब कहते हो तुम, रुक जाने के लिए..
लिल्लाह कैसे ना रुकें हम, जब सामने हो मौजूद, नायाब तुम सा..

जोगेंद्र सिंह Jogendra Singh ( 02 अगस्त 2010 )


Note :- दोस्तों, मेरी ये शायरी कोई यूँही नहीं बन पड़ी है.. "फरीदा-खानम" की एक मशहूर शायरी पर कहीं कमेन्ट लिख रहा था, तो जो कमेन्ट थी उसी ने शायरी का रूप ले लिया.. "फरीदा-खानम" की वह शायरी भी यहाँ नीचे लिखे दे रहा हूँ..
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तुम ही सोचो ज़रा, क्यूँ न रोकें तुम्हें, जान जाती है जब उठ के जाते हो तुम..
आज जाने की जिद ना करो, यूँही पहलू में बैठे रहो, आज जाने की जिद ना करो..
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Photography by : Jogendra Singh

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दोस्ती


तब भी है..
यह दोस्ती..
जब तुम न कहो..
जब हम न कहें..
शब्द सीमाओं से..
है परे की चीज़ यह दोस्ती..
ज़ज्बात मेरे-तुम्हारे..
बयाँ कर पाए..
वह है दोस्ती..
बिन कहे जो समझ जाए..
वह है दोस्ती..
न होने पर किसी के साथ निभाए..
वह है दोस्ती..
बिन चाहत जो दे चाहत..
है वह दोस्ती..
क्या कहूँ मैं..
जो मन मैं है मेरे..
है वह दोस्ती.....(..जोगी..) ( 01 अगस्त 2010 )
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