मेरे आँसुओं का सैलाब



मेरे आँसुओं का सैलाब ● ©


ऐ आसमान,
तू आज यूँ न बरस,
कि तेरे बरसने में,
मेरे आँसुओं का सैलाब,
छिप न जाये कहीं,
आज ही तो आया है,
.. वक्त ..
मेरे बरसने का,
वरना सैलाब तो क्या,
यूँ हमने,
छींटे तक न आने दिये कभी..


जोगेन्द्र सिंह Jogendra Singh (06-01-2012)
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Comments

8 Responses to “मेरे आँसुओं का सैलाब”

8 January 2012 at 2:19 PM

बहुत खूब ... अच्छा लगा आपका संवाद ...

Jogendra Singh said...
8 January 2012 at 2:39 PM

▬● दिगंबर साहब , आपका धन्यवाद......

8 January 2012 at 3:48 PM

बहुत सुन्दर... वाह!
बधाई...

Jogendra Singh said...
8 January 2012 at 8:39 PM

▬● आभार संजय साहब.......

Jogendra Singh said...
14 January 2012 at 12:04 AM

▬● सोमाली जी , शुक्रिया दोस्त.....

28 January 2012 at 7:10 PM

पढ़ रहा हूँ ...समझ रहा हूँ ..सोच रहा हूँ
गहन ...मर्मस्पर्शी ...
आपको वसंत पंचमी की ढेरों शुभकामनाएं!

Jogendra Singh said...
5 February 2012 at 6:16 PM

▬● भास्कर साहब / धन्यवाद और शुभकामनायें आपके लिए....

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