बहकाती है क्यूँ जिंदगी...? ©



बहकाती है क्यूँ जिंदगी...? ©

शुरू में गज़ल सी , फिर भटकती लय है क्यूँ जिंदगी......
हर रंग भरा इसमें तुमने , सवाल सी है क्यूँ जिंदगी.......
ज़वाब दिए खुद तुम्हीं ने , फिर अधूरी है क्यूँ जिंदगी.....
माना है डगर कठिन , कदम बहकाती है क्यूँ जिंदगी.....
मंजिल का पता नहीं पर , राह भटकाती है क्यूँ जिंदगी.....

Photography & Creation by :- जोगेन्द्र सिंह Jogendra Singh (21 दिसंबर 2010)

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Comments

2 Responses to “बहकाती है क्यूँ जिंदगी...? ©”

21 December 2010 at 11:49 PM

जोगी , बहुत प्यारा लिखा है .. एक तरन्नुम सी जिन्दगी के सभी रूप दिखा दिए.

7 March 2011 at 10:41 AM

► अपर्णा जी , धन्यवाद......

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