अकिंचन मैं.. © 2011

अकिंचन मैं..  © 2011

▬●  .....जोगेन्द्र सिंह २०/०१/२०११

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अन्तस्तल के शीशे को रौंदते पुतले..
अंतहीन अंधकार और अकिंचन मैं.........
कहाँ जाऊँ किससे गाऊँ पीड़ा अपनी..?
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Comments

4 Responses to “अकिंचन मैं.. © 2011”

kavita-mukhar said...
20 January 2011 at 11:40 AM

Mr. Jogi,
Main is samander mein boond banane ki koshish mein thi ki pahle hi kadam per aap sa toofan takraa gaya. Blog world mein bhi sahitya ki itni vistrit duniyaa basti hai, mujhe maloom na tha. Khair, main haar maanane walon mein se nahi hoon. Aapko follow kerti rahoongi. Aur Toofan na sahi, ek sasakt laher to ban hi jaungi.

23 January 2011 at 1:05 PM

कविता ,,,
आपका बात को कहने का अंदाज काफी मजेदार सा लगा..... और रही बात तूफान की तो दोस्त यहाँ तो फूंक भी बड़ी मुश्किल से निकलती है हवा का झौंका कहाँ से लाया जाये..... दूसरों को उड़ाते-उड़ाते खुद ही ना उड़ जाऊँ कहीं बस यही डर लगा रहता है.......

पत्ते को आज किसी ने तूफान कह डाला..
हाय रे तुमने आज क्या गज़ब ढा डाला..
उड़ाने की कोशिश में खुद उड़-उड़ जाता..
हवा का झौंका क्या फूंक से सरक जाता..
डाल पे लटका तब तूफान सा बना देता..
आज खुद अदने से तूफान में उड़ा जाता.. जोगेन्द्र सिंह...
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Wang Han Yang said...
23 January 2011 at 8:38 PM

Your blog is great
If you like, come back and visit mine: http://b2322858.blogspot.com/

Thank you!!Wang Han Pin(王翰彬)
From Taichung,Taiwan(台灣)

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