हूँ अभी गर्भ में



हूँ अभी गर्भ में
ले रही आकर
हुआ ही है शुरू
स्पंदन ह्रदय का
कि जान लिया
कौन हूँ मैं
जताने लायक
हैं यंत्र नए
क्या करती
तैयार हूँ कट जाने को
आएगा जोड़ा यंत्रों का
होगी कोख कलंकित
कर रहे हैं पुर्जा-पुर्जा
अलग मुझे माँ से
न सोच न ही समझ है मुझे
करूँ क्रंदन कैसे
पर दर्द समझती हूँ
तडपा रहा कटना अंगों का
बिन शब्द
बे-आवाज़ होता करुण क्रंदन
क्या सुन पायेगा कोई..... ?

लेते ज़न्म जिस कोख से
काट रहे वे
जन्मती इक नयी कोख
माँ..!! मैं तेरा अंतर हूँ
क्यूँ ना पसीजता
ह्रदय तेरा भी


सज जाते कटे अंग
धवल तस्तरी में
बंद फिर छोटे बोरे में
किसी नाले की शोभा बढ़ाते
शांत हूँ अब
लग रहा जीवन सार्थक
काम आना है
कुछ वक़्त मुझे भी
बुझा क्षुधा अपनी
खुश हैं जल-जंतु
पड़े प्रतीक्षा में
एक नए स्त्री बिम्ब की..!!


_____जोगेंद्र सिंह ( 19 मई 2010_02:21 am )

.

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Comments

8 Responses to “हूँ अभी गर्भ में”

19 May 2010 at 7:23 PM

अद्भुत वर्णन, पुनः सशक्त रचना तुम्हारी !

19 May 2010 at 7:28 PM

Anamika ji dhanywad aapka..
parantu mujhe aisa kyun lag raha hai ki is Anamika naam ke pichhe Prakriti Rai naam chhupa hua hai..

Jogi..

19 May 2010 at 8:10 PM

जोगेंद्र भाई, बहुत ही कडवा सत्य है आपकी कविता में, लेकिन इस सत्य के नेपथ्य में और भी बहुत से घिनौने सत्य छिपे हुए हैं ! मैं श्री राजीव कुमार लाल जी के विचारों से पूरी तरह सहमत हूँ कि लड़कियों के प्रति हमारी बोसीदा मानसिकता ही बहुत हद तक इस Genocide के लिए जिम्मेवार है ! वरना पशु पक्षियों और पत्थर तक को भगवान मान कर पूजने वाला समाज इतना निर्दयी कैसे हो गया - सोचने की बात है !

खैर जैसा जोगेन्द्र जी ने फ़रमाया है इस मुद्दे जितनी भी बहस की जाये कम होगी, इस लिए मैं सिर्फ कविता की ही बात करूँगा ! निम्लिखित पक्तियां इस कविता की जान और जोगेन्द्र जी की काव्य कला का बेजोड़ प्रमाण हैं :

//लग रहा जीवन सार्थक
काम आना है
कुछ वक़्त मुझे भी
बुझा क्षुधा अपनी
खुश हैं जल-जंतु
पड़े प्रतीक्षा में //

मेरी नजर में यह कविता आपने आप में मुकम्मिल और अपना सन्देश पहुँचाने में सफल रही है!

anand said...
19 May 2010 at 10:34 PM

bahut sachchi abhivyakti..
bahut bahut Badhai.....

20 May 2010 at 12:41 PM

kavita man mein jugupsa paida karti hai aur jhakjhur deti hai. is naveen , utkrisht rachna ke liye badhayi!

20 May 2010 at 5:49 PM

mujhse kisi ne Facebook par kaha tha ki -->

Amit Shanker Jha :-
how can sumone like dis pic?
i don knw y ppl put des types of pics n moreover ppl r liking it also,,,it is same as sum crime is being commiited n ppl r clapping...plz frnz...its gd 2 spread d awareness .bt plz ponder over sumone's sentiments also.
46 minutes ago ·

@@@ to us par mera zawab tha :-
दोस्त क्या तुम्हारे यहाँ अबौर्शन नहीं होते..?
क्या तुम्हारे आस पास लोग इस क्राइम को नहीं करते..?
क्या तुम्हें इस फोटो ने तुम्हें अन्दर तक दहला नहीं दिया..?
क्या तुम्हें नहीं लगता कि एक अजन्मे बच्चे के साथ इस तरह का घ्रणित काम नहीं होना चाहिए..?... See more
क्या इस कविता को पढ़ कर उस बच्चे के दर्द को तुम अनुभूत नहीं कर पा रहे हो..?
या तुम इतने कमज़ोर हो कि ऐसे किसी चित्र को देख ही नहीं सकते, और ना ही इस किता की भाषा ही बर्दाश्त कर पाते हो..?
@@@
अगर ऐसा है तो कोशिश करना कि अपने सामने भविष्य में कभी अबौर्शन नहीं होने देना..
""ना कभी कोई अबौर्शन होगा और ना ही कोई इस तरह के फोटो खींच पायेगा""..
तब कभी ऐसे किसी चित्र या कविता को तुम देख नहीं पाओगे..
@@@

Akhilesh said...
4 July 2010 at 9:29 PM
This comment has been removed by the author.
Akhilesh said...
4 July 2010 at 9:37 PM

maine abhi abhi padha aap ki ye kavita aankho me aansu la dene ke liye aur sochne ko majboor kar dene ke liye paryapt hai. aisa lag raha hai jaise aakh ke samne ek masoom ka katl hua ho.
aap is mission ko yu hi aage badhte rahiye shayad kuchh logo ki aankhe khul jay.

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