ज़िन्दगी..



दौड़ती भागती ज़िन्दगी..
खुद ही में सिमटी ज़िन्दगी..
क्या कहूँ मैं...?
कभी न सुनने वाली ये ज़िन्दगी..
आते-जाते रोटी तलाशती ये ज़िन्दगी..
न मिले कभी तो भूखी ही सो जाती ये ज़िन्दगी..

जोगेंद्र सिंह Jogendra Singh ( 08 जुलाई 2010_10:17 pm )

Photography by : Jogendra Singh
Location : Worli Naka ( Mumbai ) ( 12-04-2010 )
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Comments

6 Responses to “ज़िन्दगी..”

Udan Tashtari said...
9 July 2010 at 9:01 AM

बेहतरीन!

9 July 2010 at 12:41 PM

अत्यन्त मार्मिक पन्क्तियां......

9 July 2010 at 7:25 PM

जीवन के सत्य का आइना हैं ये पंक्तियाँ...क्षुधा बड़ी जानलेवा चीज़ है..

13 July 2010 at 6:47 PM

@ उड़न तश्तरी.. आपका धन्यवाद..

13 July 2010 at 6:52 PM

@ राणा प्रताप.. मर्म समझने के लिए शुक्रिया..

13 July 2010 at 6:53 PM

@ रोली.. सच में क्षुधा बड़ी ही जानलेवा चीज़ है..

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