सवाल और समस्या


@..उठते सवाल..@
देश के सवाल और समस्या दोनों ही बड़ी किस्म के हैं.. हम, आप या पूरा देश लाख झक मार ले पर ये उच्च कोटि के रंगमंचीय अदाकार (नेतागण) ऐसे नहीं मानने वाले.. उसके लिए कुछ क्रांतिकारी क़दमों की आवश्यकता होती है.. और जैसा कि हम जानते ही हैं कि हर रोज़ एक क्रांति नहीं होती, एक स्वतंत्रता संग्राम जन्म नहीं लिया करता.. सो इन्हें झेले जाओ बस .....
.....(..जोगी..)

सत्येन्द्र कुमार bahut khoob jogindra bhai......
haan ek wyakaranik jaankari chahunga...ki kya सटीकता sahi bhaaw wachak sangya hai???
kripya ispar prakash dalenge...

Jogendra Singh जोगेंद्र सिंह ▬► सत्येन्द्र जी.. आज व्याकरण शायद उतनी बड़ी ज़रूरत नहीं रह गयी है जितनी कि बदलावकारी सोचों का उचित मस्तिष्क तक पहुँच पाना...... :)

सत्येन्द्र कुमार jogi ji soch apni jagah hai aur use jahir karne ka praaroop apni jagah..to jab praroop hi nahi bhala hoga to badlaawkari shabdo ke sanche kitne prabhawi honge ye aboojh nahi..!..haan kisi ek-wishesh ke liye apni daanyi aankh daba lena ham-a...p jaise shabdwanshi ko shobha nahi deta na.....
waise aajtak maine kahin "sateekta "shabd nahi padha tha...sach kahoon to mujhe bhi nahi pata ki ye sahi hai ya galat...
bas aapse jaankari chahi thi ki kya ye rojmarra ki bhasha me upyog ho rha hai....
kripya anyatha na le...

Jogendra Singh जोगेंद्र सिंह ▬► सत्येन्द्र जी.. अच्छा सवाल उठाया है आपने.. जिज्ञासा ज़रूरी है, और होनी भी चाहिए क्योंकि जिज्ञासा ही ज्ञान की ओर जाने वाला पथ है.. लेकिन जानकारी के लिए बता दूँ कि ऐसे बहुत से शब्द हैं जिनका आविष्कार इसी तरह मनमाने तरीकों से हुआ है.. स्थान...ीय निवासियों के वार्तालाप का अंदाज़ सदियों में भाषा के साथ नए शब्द जोड़ता चलता है.. सो गलत कुछ भी नहीं और मानो तो सब कुछ ही गलत है.. देखें तो कभी हिंदी नाम कि कोई भाषा थी ही नहीं.. इसे कई भाषों का सम्मिश्रण करके व्युत्पन्न कर दिया गया.. तो क्या हम इसे भाषा मानने से ही इनकार कर दें, जबकि विश्व कि आबादी का एक हद से अधिक बड़ा हिस्सा इसी को अपने भावों के आदान-प्रदान का माध्यम बनाये बैठा है..?
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Comments

2 Responses to “सवाल और समस्या”

Etips-Blog Team said...
27 July 2010 at 11:09 PM

ठिक कहा आपने

आपके ब्लाँग को मोबाइल ब्लाँग एग्रीगेटर "मोबाइलवाणी" मे जोङा गया । मोबाइल पर इंटरनेट उपयोग करने वालो के लिये मोबाइल वाणी सबसे अच्छा विकल्प है ।
Www.mobilevani.tk
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30 July 2010 at 1:02 PM


जोगेन्द्र जी,
आरज़ू चाँद सी निखर जाए, ज़िंदगी रौशनी से भर जाए।
बारिशें हों वहाँ पे खुशियों की, जिस तरफ आपकी नज़र जाए।
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।

…………..
पाँच मुँह वाला नाग?
साइंस ब्लॉगिंग पर 5 दिवसीय कार्यशाला।

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