गुस्ताखी और नशा



आँखें तेरी दिल मेरा हो..गुस्ताखी तेरी दुखन मुझे हो..
नशा इश्क का कुछ हो ऐसा, बिन नशे फिर रहा ना जाये..

..जोगेंद्र सिंह Jogendra Singh.. ( 31 जुलाई 2010 )
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Comments

One response to “गुस्ताखी और नशा”

1 August 2010 at 11:22 AM

एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आप को बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
आपकी चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं

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