
आया कैसा अब ज़माना भी नया
करते दखल देखो नभचर भी हैं
दावेदार प्रेम के अब पंछी भी हैं
_____जोगेंद्र सिंह
( 22 अप्रैल 2010__12:52 pm )
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Jogendra Singh ~ जोगेंद्र सिंह..
Comments
3 Responses to “विचित्र प्रेम”
I find the bird jealous here... This pic. suggests so. But the couplet is sweet...
अंधकार में से आत संगीत से
थरथर एक रात मैंने देखा
एक हाथ मुझे बुलाता हुआ
एक पैर मेरी ओर आता हुआ
एक चेहरा मुझे सहता हुआ
एक शरीर मुझमें बहता हुआ
achha laga .shubhkamnae!
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