
वे शब्द नहीं मिलते,
जिनसे अपना प्रेम व्यक्त करूँ,
माफ़ करना ख़त संभव नहीं,
झाँक कर देखो मेरी आँखों के दरिया में,
शब्दों का बहता सैलाब नज़र आएगा तुम्हें,
डूबता-ऊबता तुम्हारे प्रेम सागर में,
ढूंढ लेना जाकर मुझे,
तुम्हें मिल जाऊँगा,
वहीँ बहते धारे बीच कहीं !!
_____जोगेंद्र सिंह ( 18 अप्रैल 2010___11:25 pm )
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Comments
2 Responses to “तुम्हें मिल जाऊँगा.. !!”
Beautiful expression of innocent love... The poem is full of life, emotions and depth. This reveals the tender heart of the poet.
thanx ◊▬►► Aparna ji...
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